🙏 मोक्षदा एकादशी (गीता जयंती)
मोक्षदायिनी — गीता जयंती इसी तिथि को।
तिथि समाप्त - 1 दिसंबर 2044 को 2:46 pm
शनिवार
🔱 शनि प्रदोष (शुक्ल — शनिवार)
प्रदोष व्रत — त्रयोदशी को सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में शिव पूजन।
प्रदोष काल - 5:23 pm से 6:53 pm तक
गुरुवार
🐘 संकष्टी चतुर्थी
संकष्टी चतुर्थी — कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, चंद्रोदय के बाद व्रत पारण।
चंद्रोदय - 8 दिसंबर 2044 को 9:07 pm
गुरुवार
🙏 सफला एकादशी
सभी प्रयास सफल करती है।
तिथि समाप्त - 15 दिसंबर 2044 को 8:09 am
शुक्रवार
☀️ धनु संक्रांति
संक्रांति — सूर्य का राशि परिवर्तन, दान-स्नान के लिए शुभ।
संक्रांति क्षण - 16 दिसंबर 2044 को 1:14 am
शनिवार
🔱 शनि प्रदोष (कृष्ण — शनिवार)
प्रदोष व्रत — त्रयोदशी को सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में शिव पूजन।
प्रदोष काल - 5:27 pm से 6:57 pm तक
रविवार
🔱 मासिक शिवरात्रि
मासिक शिवरात्रि — कृष्ण चतुर्दशी को शिव पूजन एवं रात्रि जागरण।
सोमवार
🌑 सोमवती अमावस्या
अमावस्या — अमा तिथि, पितृ तर्पण, श्राद्ध एवं दीप दान के लिए उत्तम।
शुक्रवार
🐘 विनायक चतुर्थी
विनायक चतुर्थी — शुक्ल चतुर्थी को गणेश पूजन, मध्याह्न काल श्रेष्ठ।
शुक्रवार
🙏 पुत्रदा एकादशी
संतान सुख देती है, वैकुण्ठ एकादशी।
तिथि समाप्त - 31 दिसंबर 2044 को 4:54 am
2044 की त्योहार तिथियों के बारे में
हिंदू त्योहारों की तिथियाँ ग्रेगोरियन कैलेंडर से बँधी नहीं होतीं — वे तिथि से निर्धारित होती हैं, और तिथि मध्यरात्रि से नहीं, एक निश्चित क्षण से आरंभ और समाप्त होती है। अतः त्योहार उस दिन माना जाता है जिस दिन संबंधित समय पर उसकी शासक तिथि विद्यमान हो — अधिकांश पर्वों के लिए सूर्योदय, किंतु कुछ के लिए चंद्रोदय, सूर्यास्त अथवा अर्धरात्रि। यही कारण है कि एक ही त्योहार भिन्न क्षेत्रों में भिन्न दिन पड़ सकता है, और यही कारण है कि यहाँ की तिथियाँ किसी छपे पंचांग से नकल नहीं, नई दिल्ली के लिए गणना की गई हैं।
किसी भी त्योहार की तिथि खोलकर उस दिन का पूरा पंचांग देखें, जिसमें उस कर्म के लिए अपेक्षित विशिष्ट मुहूर्त भी है — लक्ष्मी पूजन हेतु प्रदोष काल, जन्माष्टमी हेतु निशिता काल, गणेश चतुर्थी हेतु मध्याह्न, तथा रक्षाबंधन व होलिका दहन हेतु भद्रा के पश्चात का काल।