आज

पंचांग — 6 अक्टूबर 2030, कोलकाता

रविवार · कोलकाता · पश्चिम बंगाल

दशमी
5:33 pm तक
शुक्ल पक्ष · आश्विन
नक्षत्र श्रवण
योग सुकर्म
वार रविवार
सूर्य राशि कन्या

आज के त्योहार

दशहरा (विजयदशमी)
विजयादशमी — भगवान राम की रावण पर विजय, अपराह्न काल में शस्त्र पूजन।
अपराह्न: 12:35 pm – 2:57 pm

पंचांग विवरण

तिथि दशमी 5:29 am – 5:33 pm
एकादशी 5:33 pm से · पूर्ण रात्रि
नक्षत्र श्रवण 1:12 am तक
योग सुकर्म 9:54 am तक
करण तैतिल 6:11 am तक
वार रविवार सूर्य
पक्ष शुक्ल पक्ष
मास (अमांत) आश्विन
मास (पूर्णिमांत) आश्विन
चंद्र राशि मकर 1:03 pm तक
सूर्य राशि कन्या

शुभ मुहूर्त

मुहूर्तसमय
ब्रह्म मुहूर्त 3:52 am – 4:41 am
अभिजित मुहूर्त 11:00 am – 11:48 am
विजय मुहूर्त 11:00 am – 11:48 am
गोधूलि मुहूर्त 4:55 pm – 5:43 pm
प्रदोष काल 5:19 pm – 6:49 pm
निशिथ काल 11:00 pm – 11:49 pm

अशुभ काल

मुहूर्तसमय
राहु काल 5:29 am – 6:58 am
गुलिक काल 2:22 pm – 3:50 pm
यमगण्ड 11:24 am – 12:53 pm

चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

चौघड़िया समय शुभ/अशुभ
उद्वेग 5:29 am – 6:58 am अशुभ
चर 6:58 am – 8:27 am शुभ
लाभ 8:27 am – 9:55 am शुभ
अमृत 9:55 am – 11:24 am शुभ
काल 11:24 am – 12:53 pm अशुभ
शुभ 12:53 pm – 2:22 pm शुभ
रोग 2:22 pm – 3:50 pm अशुभ
उद्वेग 3:50 pm – 5:19 pm अशुभ

रात का चौघड़िया

चौघड़िया समय शुभ/अशुभ
शुभ 5:19 pm – 6:50 pm शुभ
अमृत 6:50 pm – 8:22 pm शुभ
चर 8:22 pm – 9:53 pm शुभ
रोग 9:53 pm – 11:24 pm अशुभ
काल 11:24 pm – 12:56 am अशुभ
लाभ 12:56 am – 2:27 am शुभ
उद्वेग 2:27 am – 3:58 am अशुभ
शुभ 3:58 am – 5:29 am शुभ

होरा

दिन की होरा

होरा समय
सूर्य 5:29 am – 6:28 am
शुक्र 6:28 am – 7:27 am
बुध 7:27 am – 8:27 am
चंद्र 8:27 am – 9:26 am
शनि 9:26 am – 10:25 am
गुरु 10:25 am – 11:24 am
मंगल 11:24 am – 12:23 pm
सूर्य 12:23 pm – 1:22 pm
शुक्र 1:22 pm – 2:22 pm
बुध 2:22 pm – 3:21 pm
चंद्र 3:21 pm – 4:20 pm
शनि 4:20 pm – 5:19 pm

रात की होरा

होरा समय
गुरु 5:19 pm – 6:20 pm
मंगल 6:20 pm – 7:21 pm
सूर्य 7:21 pm – 8:22 pm
शुक्र 8:22 pm – 9:22 pm
बुध 9:22 pm – 10:23 pm
चंद्र 10:23 pm – 11:24 pm
शनि 11:24 pm – 12:25 am
गुरु 12:25 am – 1:26 am
मंगल 1:26 am – 2:27 am
सूर्य 2:27 am – 3:28 am
शुक्र 3:28 am – 4:29 am
बुध 4:29 am – 5:29 am
विस्तार से देखें — कोलकाता का पूरा <a href="/choghadiya/kolkata/2030-10-06">चौघड़िया</a>, <a href="/shubh-muhurat/kolkata/2030-10-06">शुभ मुहूर्त</a> और <a href="/rahu-kaal/kolkata/2030-10-06">राहु काल</a>, अथवा <a href="/hindu-calendar/2030/10">मासिक हिंदू कैलेंडर</a> देखें।

रविवार, 6 अक्टूबर 2030 को कोलकाता का पंचांग तिथि दशमी और नक्षत्र श्रवण दर्शाता है। सूर्योदय 5:29 am और सूर्यास्त 5:19 pm बजे है। इस पृष्ठ का प्रत्येक समय कोलकाता के अपने अक्षांश-देशांतर के अनुसार गणना किया गया है — किसी दिल्ली-आधारित पंचांग से नकल नहीं — इसलिए नीचे दिए गए मुहूर्त वही हैं जो वास्तव में आपके स्थान पर लागू होते हैं।

पंचांग क्या है?

पंचांग का शाब्दिक अर्थ है "पाँच अंग" (पंच + अंग)। यह हिंदू कालगणना की वह पद्धति है जो किसी भी दिन को पाँच खगोलीय तत्वों के माध्यम से परिभाषित करती है। ये पाँचों तत्व सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से निकलते हैं और मिलकर बताते हैं कि दिन किस प्रकार का है तथा उसका कौन-सा भाग किस कार्य के लिए उपयुक्त है।

  • तिथि — चंद्र दिवस। एक चंद्र मास में तीस तिथियाँ होती हैं। जब चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ जाता है तब एक तिथि पूर्ण होती है, इसलिए तिथि प्रायः घड़ी के दिन से मेल नहीं खाती और दोपहर में आरंभ होकर अगले दिन समाप्त हो सकती है।
  • वार — सप्ताह का दिन, प्रत्येक का एक स्वामी ग्रह। वार ही राहु काल और चौघड़िया का क्रम निर्धारित करता है।
  • नक्षत्र — चंद्रमा जिस तारामंडल में स्थित है, कुल सत्ताईस। नक्षत्र दिन का स्वभाव तय करता है और नामकरण, यात्रा तथा विवाह के निर्णयों में केंद्रीय है।
  • योग — सूर्य और चंद्रमा के संयुक्त भोगांश से बनने वाले सत्ताईस संयोगों में से एक।
  • करण — तिथि का आधा भाग। कुल ग्यारह करण होते हैं, जिनमें विष्टि करण को ही भद्रा कहा जाता है।

एक ही दिन का पंचांग शहर के अनुसार क्यों बदलता है?

पंचांग कोई स्थिर तालिका नहीं है — यह सूर्योदय पर आधारित गणना है। कोलकाता का सूर्योदय कोलकाता या मुंबई के सूर्योदय से कुछ मिनट से लेकर एक घंटे तक भिन्न हो सकता है, और उसी के साथ प्रत्येक व्युत्पन्न अवधि खिसक जाती है। राहु काल, चौघड़िया, अभिजित मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त और दिनमान के सभी काल — ये सब सूर्योदय से सूर्यास्त के अंतराल के अंश मात्र हैं। गलत शहर का पंचांग देखने का अर्थ है गलत मुहूर्त, इसीलिए यह वेबसाइट शहर पूछती है, मान नहीं लेती।

ये गणनाएँ कैसे की जाती हैं?

सभी गणनाएँ दृक् गणित (प्रत्यक्ष-दर्शन आधारित) पद्धति से की गई हैं, न कि प्राचीन सूर्य सिद्धांत की सन्निकट विधि से। सूर्य और चंद्रमा के भोगांश आधुनिक खगोलीय पंचांग (ephemeris) से निकाले जाते हैं, सूर्योदय-सूर्यास्त में वायुमंडलीय अपवर्तन सहित मानक विधि प्रयुक्त होती है, तथा तिथि, नक्षत्र, योग और करण की संधियाँ उस सटीक क्षण को हल करके निकाली जाती हैं जब संबंधित कोणीय स्थिति पूर्ण होती है। यही गणना इंजन देव पंचांग एंड्रॉइड ऐप में भी चलता है, अतः दोनों में कभी अंतर नहीं आता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता में आज की तिथि क्या है?

6 अक्टूबर 2030 को कोलकाता में तिथि दशमी है, जो 5:33 pm तक रहेगी। अधिकांश परंपराओं में सूर्योदय के समय चल रही तिथि ही उस दिन की तिथि मानी जाती है।

आज का नक्षत्र कौन-सा है?

6 अक्टूबर 2030 को कोलकाता में चंद्रमा श्रवण नक्षत्र में है, जो 1:12 am तक रहेगा।

कोलकाता में आज राहु काल कितने बजे है?

6 अक्टूबर 2030 को कोलकाता में राहु काल 5:29 am – 6:58 am है। यह सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय का आठवाँ भाग होता है, और यह कौन-सा आठवाँ भाग होगा यह वार पर निर्भर करता है — इसीलिए सप्ताह भर इसका समय बदलता रहता है।

आज अभिजित मुहूर्त कब है?

6 अक्टूबर 2030 को कोलकाता में अभिजित मुहूर्त 11:00 am – 11:48 am है। यह स्थानीय मध्याह्न के आसपास लगभग 48 मिनट की अवधि है और लगभग प्रत्येक दिन कार्यारंभ के लिए शुभ मानी जाती है, कुछ परंपराओं में बुधवार को छोड़कर।

ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?

ब्रह्म मुहूर्त 3:52 am – 4:41 am है, जो सूर्योदय 5:29 am से कुछ पहले समाप्त होता है। यह रात्रि के अंतिम प्रहर की चौथी और तीसरी मुहूर्त-अवधि है और अध्ययन, ध्यान तथा पूजा के लिए पारंपरिक रूप से सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है।

क्या आज का दिन शुभ है?

कोलकाता में 6 अक्टूबर 2030 को दशहरा (विजयदशमी) है, अतः यह पर्व दिवस है। त्योहार के अतिरिक्त, विशिष्ट घड़ी चुनने के लिए इस पृष्ठ की चौघड़िया और शुभ मुहूर्त सारणी देखें — बहुत कम दिन पूर्णतः शुभ या पूर्णतः अशुभ होते हैं।

यहाँ का सूर्योदय अन्य पंचांग वेबसाइटों से अलग क्यों है?

इस पृष्ठ पर सूर्योदय 5:29 am और सूर्यास्त 5:19 pm है, जो कोलकाता के सटीक निर्देशांकों के लिए मानक अपवर्तन विधि से गणना किया गया है। जो साइटें पूरे देश के लिए एक ही सूर्योदय छापती हैं या पाँच मिनट में पूर्णांकित करती हैं, उनमें कई मिनट का अंतर आएगा — और सूर्योदय से निकलने वाला हर मुहूर्त वही अंतर अपने साथ ले जाता है।

यह पंचांग किस मास पद्धति का अनुसरण करता है?

दोनों पद्धतियाँ दिखाई जाती हैं। अमांत मास (अमावस्या पर समाप्त) महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में प्रचलित है; पूर्णिमांत मास (पूर्णिमा पर समाप्त) उत्तर भारत के अधिकांश भाग में। तिथि और त्योहार की तारीखें दोनों में समान रहती हैं — केवल मास का नाम बदलता है।

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