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राहु काल — 17 सितंबर 2026, वाराणसी

गुरुवार · वाराणसी

राहु काल 1:24 pm – 2:56 pm
गुलिक काल 8:48 am – 10:20 am
यमगण्ड 5:44 am – 7:16 am

अशुभ काल

मुहूर्तसमय
राहु काल 1:24 pm – 2:56 pm
गुलिक काल 8:48 am – 10:20 am
यमगण्ड 5:44 am – 7:16 am

इस सप्ताह का राहु काल — वाराणसी

वार राहु काल गुलिक काल यमगण्ड
गुरुवार 17 सितंबर 2026 1:24 pm – 2:56 pm 8:48 am – 10:20 am 5:44 am – 7:16 am
शुक्रवार 18 सितंबर 2026 10:20 am – 11:52 am 7:16 am – 8:48 am 2:55 pm – 4:27 pm
शनिवार 19 सितंबर 2026 8:48 am – 10:20 am 5:45 am – 7:17 am 1:23 pm – 2:54 pm
रविवार 20 सितंबर 2026 5:45 am – 7:17 am 2:54 pm – 4:25 pm 11:51 am – 1:22 pm
सोमवार 21 सितंबर 2026 7:17 am – 8:48 am 1:22 pm – 2:53 pm 10:19 am – 11:51 am
मंगलवार 22 सितंबर 2026 2:52 pm – 4:23 pm 11:50 am – 1:21 pm 8:48 am – 10:19 am
बुधवार 23 सितंबर 2026 11:50 am – 1:21 pm 10:19 am – 11:50 am 7:17 am – 8:48 am

शुभ मुहूर्त

मुहूर्तसमय
ब्रह्म मुहूर्त 4:11 am – 4:58 am
अभिजित मुहूर्त 11:27 am – 12:17 pm
विजय मुहूर्त 11:27 am – 12:17 pm
गोधूलि मुहूर्त 5:36 pm – 6:24 pm
प्रदोष काल 6:00 pm – 7:30 pm
निशिथ काल 11:29 pm – 12:16 am

वाराणसी में गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को राहु काल 1:24 pm – 2:56 pm है। सूर्योदय 5:44 am तथा सूर्यास्त 6:00 pm है; राहु काल इन दोनों के बीच के समय का आठवाँ भाग होता है, और कौन-सा आठवाँ भाग यह वार पर निर्भर करता है।

राहु काल क्या है?

राहु काल दिन का वह भाग है जिसका स्वामी राहु (उत्तर चंद्र-पात) है। दैनिक हिंदू व्यवहार में यह सर्वाधिक माना जाने वाला अशुभ काल है — पूर्ण मुहूर्त देखने वालों से कहीं अधिक लोग राहु काल का त्याग करते हैं। नया कार्य, यात्रा, क्रय, अनुबंध पर हस्ताक्षर तथा मांगलिक कार्य परंपरागत रूप से इससे बाहर रखे जाते हैं। जो कार्य पहले से चल रहा हो उस पर इसका प्रभाव नहीं माना जाता; त्याग केवल आरंभ का है।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

दिनमान को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। पहला भाग किसी भी दिन राहु काल नहीं होता। कौन-सा भाग राहु का होगा, इसका वार-क्रम निश्चित है — सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग। चूँकि ये भाग वास्तविक दिनमान के अंश हैं, इसलिए राहु काल ग्रीष्म में लंबा और शीत में छोटा होता है, तथा एक ही तिथि को अलग-अलग शहरों में भिन्न होता है।

गुलिक काल और यमगण्ड

दो अन्य अशुभ काल इसी विधि से निकाले जाते हैं। गुलिक काल (जिसे मांदी भी कहते हैं, स्वामी शनि-पुत्र) सामान्यतः राहु काल से कम कठोर माना जाता है और कुछ परंपराओं में कुछ विशिष्ट कार्यों के लिए अनुकूल भी माना गया है। यमगण्ड, जिसका स्वामी यम है, यात्रा तथा स्वास्थ्य संबंधी कार्यों में वर्जित है। इस पृष्ठ पर तीनों दिए गए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाराणसी में आज राहु काल कितने बजे है?

17 सितंबर 2026 को वाराणसी में राहु काल 1:24 pm – 2:56 pm है।

राहु काल में क्या नहीं करना चाहिए?

कोई भी नया कार्य आरंभ न करें — यात्रा, व्यापार, मूल्यवान वस्तु का क्रय, अनुबंध अथवा मांगलिक संस्कार। नित्य कार्य, पहले से चल रहा कार्य तथा नित्य पूजा वर्जित नहीं है।

क्या राहु काल प्रतिदिन एक ही समय पर होता है?

नहीं। यह वार के साथ और दिनमान की लंबाई के साथ बदलता है। एक ही तिथि को यह अलग-अलग शहरों में भी भिन्न होता है, क्योंकि इसकी गणना उसी शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से होती है।

राहु काल कितनी देर रहता है?

लगभग डेढ़ घंटा — ठीक-ठीक सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय का आठवाँ भाग, अतः ग्रीष्म में कुछ अधिक और शीत में कुछ कम।

क्या रात्रि में भी राहु काल होता है?

सामान्यतः माना जाने वाला राहु काल दिन का ही होता है। कुछ परंपराओं में सूर्यास्त से सूर्योदय तक के अंतराल से रात्रि-राहु काल भी निकाला जाता है, किंतु उसका प्रचलन बहुत कम है।

17 सितंबर 2026 — वाराणसी

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