शुभ मुहूर्त — 16 अगस्त 2026, जयपुर
रविवार · जयपुर
शुभ मुहूर्त
| मुहूर्त | समय |
|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त | 4:31 am – 5:15 am |
| अभिजित मुहूर्त | 12:04 pm – 12:57 pm |
| विजय मुहूर्त | 12:04 pm – 12:57 pm |
| गोधूलि मुहूर्त | 6:39 pm – 7:27 pm |
| प्रदोष काल | 7:03 pm – 8:33 pm |
| निशिथ काल | 12:09 am – 12:53 am |
अशुभ काल
| मुहूर्त | समय |
|---|---|
| राहु काल | 5:58 am – 7:36 am |
| गुलिक काल | 3:47 pm – 5:25 pm |
| यमगण्ड | 12:31 pm – 2:09 pm |
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
| चौघड़िया | समय | शुभ/अशुभ |
|---|---|---|
| उद्वेग | 5:58 am – 7:36 am | अशुभ |
| चर | 7:36 am – 9:14 am | शुभ |
| लाभ | 9:14 am – 10:52 am | शुभ |
| अमृत | 10:52 am – 12:31 pm | शुभ |
| काल | 12:31 pm – 2:09 pm | अशुभ |
| शुभ | 2:09 pm – 3:47 pm | शुभ |
| रोग | 3:47 pm – 5:25 pm | अशुभ |
| उद्वेग | 5:25 pm – 7:03 pm | अशुभ |
रात का चौघड़िया
| चौघड़िया | समय | शुभ/अशुभ |
|---|---|---|
| शुभ | 7:03 pm – 8:25 pm | शुभ |
| अमृत | 8:25 pm – 9:47 pm | शुभ |
| चर | 9:47 pm – 11:09 pm | शुभ |
| रोग | 11:09 pm – 12:31 am | अशुभ |
| काल | 12:31 am – 1:53 am | अशुभ |
| लाभ | 1:53 am – 3:15 am | शुभ |
| उद्वेग | 3:15 am – 4:37 am | अशुभ |
| शुभ | 4:37 am – 5:59 am | शुभ |
जयपुर में 16 अगस्त 2026 के शुभ मुहूर्त। अभिजित मुहूर्त 12:04 pm – 12:57 pm है। नीचे दी गई प्रत्येक अवधि उसी दिन के जयपुर के वास्तविक सूर्योदय-सूर्यास्त से निकाली गई है, अतः ये वर्ष भर स्थिर घड़ी-समय पर नहीं रहतीं, बदलती रहती हैं।
शुभ काल
- ब्रह्म मुहूर्त — भोर से पूर्व रात्रि का अंतिम भाग; अध्ययन, ध्यान, जप और पूजा के लिए परंपरागत रूप से सर्वश्रेष्ठ।
- अभिजित मुहूर्त — स्थानीय मध्याह्न के आसपास लगभग 48 मिनट। लगभग हर कार्य के आरंभ के लिए शुभ, और अनेक अन्य दोषों का शमन करने वाला माना गया है।
- विजय मुहूर्त — अपराह्न का "विजय" काल; प्रतियोगिता, वाद-विवाद तथा साहस अपेक्षित कार्यों के लिए श्रेष्ठ।
- गोधूलि मुहूर्त — सूर्यास्त के आसपास का वह संध्या-काल जब गौएँ लौटती हैं; अनेक परंपराओं में विवाह संस्कार हेतु शुभ।
- प्रदोष काल — सूर्यास्त से रात्रि के प्रथम पंचमांश तक; शिव पूजा तथा दीपावली लक्ष्मी पूजन का काल।
- निशिथ काल — अर्धरात्रि की अवधि; जन्माष्टमी और महाशिवरात्रि की पूजा इसी में होती है।
त्याज्य काल
राहु काल, गुलिक काल और यमगण्ड — तीनों दिनमान के आठवें भाग हैं और वार के अनुसार निर्धारित होते हैं। भद्रा (विष्टि करण) इनसे भिन्न है — यह सूर्योदय से नहीं, तिथि से निकलती है, इसलिए केवल कुछ ही दिनों में आती है, और रक्षाबंधन तथा होलिका दहन के कर्म उसके समाप्त होने तक विशेष रूप से वर्जित रहते हैं।
मुहूर्त कैसे चुनें
व्यवहार में चयन नहीं, प्रतिच्छेदन किया जाता है। कार्य के अनुकूल शुभ काल लीजिए, देखिए कि वह राहु काल या भद्रा से न टकराए, फिर उसी के भीतर चौघड़िया से समय और सूक्ष्म कीजिए। विवाह, नामकरण अथवा गृहप्रवेश के लिए यह पृष्ठ आरंभ-बिंदु मात्र है — उनमें जातकों के जन्म-विवरण की आवश्यकता होती है और वह पंडित जी से ही निश्चित कराना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जयपुर में आज का शुभ मुहूर्त क्या है?
16 अगस्त 2026 को जयपुर में अभिजित मुहूर्त 12:04 pm – 12:57 pm और ब्रह्म मुहूर्त 4:31 am – 5:15 am है। शुभ तथा अशुभ कालों की पूरी सूची ऊपर की सारणियों में है।
वाहन या संपत्ति क्रय के लिए कौन-सा मुहूर्त श्रेष्ठ है?
सामान्य प्रयोजन के लिए अभिजित मुहूर्त उपयुक्त है। उसके भीतर लाभ या अमृत चौघड़िया चुनें, और देख लें कि वह राहु काल से न टकराए। संपत्ति के लिए अनेक लोग तिथि भी देखते हैं और अमावस्या तथा चतुर्थी, अष्टमी, नवमी व चतुर्दशी का त्याग करते हैं।
क्या अभिजित मुहूर्त में कोई भी कार्य आरंभ किया जा सकता है?
अभिजित लगभग सभी कार्यों के लिए शुभ माना गया है और कहा जाता है कि यह अन्यथा दुर्बल समय के अनेक दोषों का शमन कर देता है। सामान्य अपवाद बुधवार है, जिस दिन कुछ परंपराएँ अभिजित नहीं मानतीं।
भद्रा क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
भद्रा विष्टि करण है — ग्यारह करणों में से एक, जो केवल कुछ दिनों में आता है। यह विशिष्ट कर्मों को वर्जित करता है, विशेषतः रक्षाबंधन और होलिका दहन, जो भद्रा समाप्त होने के बाद ही किए जाते हैं। यदि इस दिन भद्रा हो तो वह ऊपर अशुभ काल की सारणी में दिखाई देगी।
क्या विवाह के लिए इस पृष्ठ का मुहूर्त पर्याप्त है?
नहीं। विवाह मुहूर्त केवल दिन पर नहीं, वर-वधू दोनों की जन्म कुंडली पर निर्भर करता है। इस पृष्ठ से दिन और अवधि छाँट लीजिए, फिर पंडित जी से अंतिम निर्णय कराइए।